हम क्यों झूठ बोलते हैं?

यद्यपि झूठ को असहमति के साथ देखा जाता है और एक सामाजिक बुराई के रूप में माना जाता है, लेकिन झूठ निश्चित रूप से सामाजिक और जीवन के भौतिक पहलुओं का एक अभिन्न अंग है। समय के साथ, हम इंसानों ने इसे कला में रूपांतरित कर दिया है, कई अलग व्यक्तित्वों और रूपों वाले बहुमुखी कला में।

हालांकि हमारे पास लाखों बनावटी तथा छद्म-स्पष्टीकरण हैं कि हम झूठ क्यों बोलते हैं, लेकिन यह सब एक ही सार्वभौमिक सच्चाई पर आकर रुक जाते हैं और वह है कि हम महत्व की हमारी भावना को बढ़ाने के लिए झूठ बोलते हैं। हम उन चीज़ों को प्राप्त करने के लिए झूठ बोलते हैं जिन्हें अन्यथा इनकार किया जाएगा, हम सजा से बचने के लिए झूठ बोलते हैं, या शायद हम झूठ बोलते हैं क्योंकि हमें काल्पनिक से तथ्य का भेद नहीं पता।
झूठ का जो कुछ भी कारण हो, एक बात एक संदेह की छाया से परे है, हालांकि हम निश्चित रूप से हमेशा सच्चाई जानते हैं, जानते हैं कि सच्च क्या है और झूठ क्या परन्तु झूठ सभी मानव घटनाओं में इतना प्रचलित हो गए हैं कि लोगों को सबसे अधिक विरोधाभासी झूठों के लिए भी सरल स्पष्टीकरण मिल गयें हैं। झूठ का तथ्यों के विरूपण के साथ कुछ भी लेना-देना नहीं है, अपितु मानव भावनाओं और गर्व से सब कुछ है। झूठ तो असल में अहंकार और आत्ममोह का प्रतिबिंब है। लोग हमेशा, राजनेताओं और प्रचारकों को झूठ का प्रतीक मानते हैं, लेकिन क्या यह पक्षपाता नहीं ? आख़िरकार झूठ तो सभी बोलतें हैं ।
यूँ तो झूठ की अपनी कोई विशेषता नहीं होती ,लेकिन इसे झूठ बोलनेवाले की विशेषताओं द्वारा आसानी से पचाना जा सकता है। और शयद इसीलिए हमनें झूठ को नहीं, बल्की झूठों को वर्गीकृत किया है।
हमारे पास हैं :-
कुख्यात झूठे : जो झूठ को सच्चाई की जगह पारित करने के ईमानदार प्रयासों के बावजूद, अपनी घृणित प्रतिष्ठा से ही जानें जाते हैं। ये सिर्फ़ एक अजनबी को ही बेवकूफ़ बना सकते हैं, परन्तु वो भी लंबे समय तक नहीं।
माँझे हुए झूठे: इन्होंने झूठ बोलने की कला में महारथ हासिल की है। ये अव्वल दर्जे के और सहजवृत्ति वाले झूठे होते हैं, यह असंभव है कि कोई भी इनके जैसी निपूर्णता के साथ झूठ बेल सके। इनके झूठों को हमेशा सफलता का ताज पहनाया जाता हैं, क्योंकि ये अपने शब्दों से किसी भी श्रोता को मंत्रमुग्ध कर सकते हैं। श्रोता जाने-अनजाने में इनके हर झूठ को सत्य के सुसमाचार के तैर पर में मान लेते हैं।
छंटे हुए झूठे : झूठ से इनको अभेद्य प्रेम तथा एक प्रकार की अपरिहार्य दासता है। इनके झूठों को अकसर पकड़ा जा सकते हैं, इसके बावजूद झूठ बोलतें हैं।
कट्टर झूठे : ये आदत के जीव हैं। अब झूठ न बोलना सीखना इनके लिए बहुत मुश्किल है। झूठ ने अपनी जड़ों को गहराई तक मजबूती से बांटा है, जो की इनकी आदत का रूप ले चुकी है। उनके लिए झूठ बोलना सुबह की चाय या कॉफी और टोस्ट लेने जैसा है ।
जन्मजात झूठे: इनका मिथ्याकरण का इतना लंबा इतिहास है कि कोई नीसंदेह कह सकता है, की जब ये अपनी मां के गर्भ में पुनर्वास कर रहे थे तब इनका उपाध्यक्ष शुरू हुआ। दूसरे शब्दों में, और प्रभाव के लिए अतिशयोक्ति का उपयोग करते हुए आप कह सकते हैं की ये अपने जन्म के क्षण से झूठ बोल रहे हैं।
झूठ के आदी झूठे: इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, ये कभी भी झूठ बोलना बंद नहीं करते। लोग अवसरों पर या अक्सर विशेष कारणों से झूठ बोलते हैं, लेकिन ये लगातार झूठ बोलते हैं, कभी-कभी या कभी-कभी नहीं, अधिक से अधिक झूठ बोलते हैं।
तर्कहीन झूठे : इन्हे एक आजीब बीमारी है। इनको सच्च और झूठ के बीच के अंतर की चिंता नहीं होती , और न ही ये तथ्यों को फंतासी से अलग करने के लिए परेशान होते हैं। वास्तव में, इनका झूठ बोलना एक लाइलाज़ बीमारी की तहर है , जिसको किस भी एंटीबायोटिक या दवा से ठीक नहीं किया जा सकता।
निर्लज्ज झूठे : ये बेशरम होते हैं, इनके लीए इन्हें मायने नहीं रखता, कि इनके झुठों के कारण निर्दोष पीड़ितों को क्या-क्या झेलना पड़ता हैं। इन्हें तो इसका पछतावा तक नहीं होता। पूरी तरह से बेईमान, इन वक्तियों से घुलना-मिलना खतरनाक होता हैं।
निपुण झूठे: इनके पास एक जीवंत कल्पनाशक्ति और लप-लपाती ज़ुबान होती है , ये तथ्यों को आसानी से तोड़-मरोड़ लेते हैं मनो जैसे अपना नाम कह रहें हों। हालांकि ऐसा नहीं है की इनका झूठ हमेशा पकड़ा नहीं जाता पर, फ़िर भी, इनकी हर बात को हमेशा संदेह से देखा जाता है। ये इतने हाज़िर ज़वाब होते हैं की अक्सर इनके उत्तरों को सच मानने में कठनाई होती है। भले ही आप इनके झुठों को तुरंत पकड़ लें, परन्तु आप पिछले बुरे अनुभव से यह जानते हैं की, जब ये बात कर रहें हो तो महत्वपूर्ण संकायों को निलंबित नहीं करना चाहिए। यूँ तो लोग इनकी चुस्त बुद्धिमत्तता की प्रशंसा करते हैं लेकिन इनको हमेशा संदेहास्पद स्वरों से ही सुनते हैं।
झूठ कैसा भी हो, वे बुरा ही है, और अक्सर अन्य लोगों के लिए हानिकारक होते हैं, परन्तु कभी-ना-कभी किसी विशेष रूप में आप पर भी खतरनाक प्रभाव दाल सकता है। अच्छे में अच्छा, यदि आपके झूठ को पकड़ लिया जाए तो केवल आपको कुछ शर्मिन्दगी भुगतनी पड़ती है। जबकि बुरे में बुरा, यदि आपको अपने धोखे में सफलता मील जाये तो पर भी, आपके चरित्र की ही विकृत होती है और ऊसूलों को छत्ती पहुँचती है।
संक्षेप में, सभी झूठ हानिकारक हैं, पर ये अनैतिकता से कम नहीं। यदि आप इनमें से किसी एक तरह के भी झूठे हैं, तो भी आपके सभी झूठ –  निन्दनीय, अनुमानीत , पूर्वनिर्धारित, नीस्नेह और जानबूझे हैं।
झूठों का वर्गीकरण वर्ड पावर नोर्मन लुईस, 1 9 4 9 [आईएसबीएन: 8183071007], से प्रेरित

 

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One thought on “झूठ, और उन झूठों को बोलने वाले झूठे

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